Chaupai Sahib: Are you looking for a Benti Chaupai Sahib In Hindi? Yeah! We give the full text in Hindi script, as well as basic information about its meaning and importance. So, below is the Chaupai Sahib Hindi Path that you can read clearly.
Chaupai Sahib Hindi
Here is the Chaupai Sahib Hindi lyrics and pdf you can check and read all lines clearly.
पातिसाही दसवीं॥
कबियो बाच बेनती ॥
चौपई ॥
चौपई १
पूरन होय चित्त की इच्छा ॥
तव चरनन मन रहै हमारा ॥
अपना जान करो प्रतिपारा ॥१॥
हिंदी अर्थ
अर्थ: हे प्रभु, अपने हाथ देकर मेरी रक्षा करें। मेरे मन की सभी पवित्र इच्छाएं पूरी हों। मेरा मन हमेशा आपके चरणों में लीन रहे और मुझे अपना जानकर मेरा पालन-पोषण करें।
चौपई २
आप हाथ दै मोहि बचावहु ॥
सुखी बसै मोरो परिवारा ॥
सेवक सिख्य सभै करतारा ॥२॥
हिंदी अर्थ
अर्थ: हे प्रभु, मेरे सभी शत्रुओं और दुर्गुणों का नाश करें। अपने हाथ से मुझे बचाएं। मेरा परिवार और सभी सेवक व सिख सुखी रहें।
चौपई ३
सभ बैरिन कौ आज संघरियै ॥
पूरन होय हमारी आसा ॥
तोरि भजन की रहै प्यासा ॥३॥
हिंदी अर्थ
अर्थ: हे प्रभु, अपने हाथ से मेरी रक्षा करें और मेरे सभी शत्रुओं तथा बुरी शक्तियों को दूर करें। मेरी आशाएं पूरी हों और मेरे मन में हमेशा आपके भजन की प्यास बनी रहे।
चौपई ४
जो बर चहों सु तुमते पाऊं ॥
सेवक सिख्य हमारे तारियहि ॥
चुन चुन श्त्रु हमारे मारियहि ॥४॥
हिंदी अर्थ
अर्थ: हे प्रभु, आपको छोड़कर मैं किसी अन्य का ध्यान न करूँ। जो भी वर मैं चाहूँ, वह केवल आपसे ही प्राप्त करूँ। मेरे सभी सेवक और सिख पार उतरें और चुन-चुनकर सभी बुराइयों व शत्रुओं का नाश हो।
चौपई ५
मरन काल का त्रास निवरियै ॥
हूजो सदा हमारे पच्छा ॥
स्री असिधुज जू करियहु रच्छा ॥५॥
हिंदी अर्थ
अर्थ: हे प्रभु, अपने हाथ से मुझे उबारें और मृत्यु के भय को दूर करें। सदा मेरे पक्ष में रहें और हे असिधुज (खड्गधारी प्रभु), मेरी रक्षा करें।
चौपई ६
साहिब संत सहाय प्यारे ॥
दीनबंधु दुष्टन के हंता ॥
तुमहो पुरी चतुर्दस कंता ॥६॥
हिंदी अर्थ
अर्थ: हे रक्षणहार प्रभु, संतों के सच्चे सहायक और दीनों के बंधु, आप ही मुझे बचाएं। आप चौदह लोकों के स्वामी और दुष्टों का नाश करने वाले हैं।
चौपई ७
काल पाए सिवजू अवतरा ॥
काल पाए कर बिसन प्रकासा ॥
सकल काल का कीया तमासा ॥७॥
हिंदी अर्थ
अर्थ: समय आने पर ब्रह्मा जी ने शरीर धारण किया, शिव जी अवतरित हुए और विष्णु जी का प्रकाश हुआ। यह सब परम प्रभु का ही रचा हुआ कौतुक (लीला) है।
चौपई ८
बेद राज ब्रह्मा जू थीयो ॥
जवन काल सभ लोक सवारा ॥
नमस्कार है ताहि हमारा ॥८॥
हिंदी अर्थ
अर्थ: जिस प्रभु ने शिव जी को योगी बनाया और ब्रह्मा जी को वेदों का ज्ञाता बनाया, उस संसार रचने वाले प्रभु को मेरा नमस्कार है।
चौपई ९
देव दैत जच्छन उपजायो ॥
आदि अंत एकै अवतारा ॥
सोई गुरू समझियहु हमारा ॥९॥
हिंदी अर्थ
अर्थ: जिस परम शक्ति ने पूरे संसार की रचना की और देवताओं, दैत्यों तथा अन्य जीवों को उत्पन्न किया, वही आदि से अंत तक सबका आधार है। उसी को अपना गुरु समझना चाहिए।
चौपई १०
सकल प्रजा जिन आप सवारी ॥
सिवकन को सवगुन सुख दीयो ॥
श्त्रुन को पल मो बध कीयो ॥१०॥
हिंदी अर्थ
अर्थ: मैं उस परम शक्ति को प्रणाम करता हूं जिसने सभी प्राणियों की रचना और देखभाल की है। वह अपने सेवकों को अच्छे गुण और सुख देता है तथा बुराई करने वालों को उनके कर्मों का फल देता है।
चौपई ११
भले बुरे की पीर पछानत ॥
चीटी ते कुंचर अस्थूला ॥
सभ पर कृपा दृष्टि कर फूला ॥११॥
हिंदी अर्थ
अर्थ: परमात्मा हर जीव के मन की बात जानता है और अच्छे-बुरे सभी की पीड़ा को समझता है। छोटी चींटी से लेकर बड़े हाथी तक, वह सभी पर अपनी कृपा की दृष्टि रखता है।
चौपई १२
सुख पाए साधन के सुखी ॥
एक एक की पीर पछानै ॥
घट घट के पट पट की जानै ॥१२॥
हिंदी अर्थ
अर्थ: परमात्मा संतों के दुख में दुखी होता है और उनके सुख में प्रसन्न होता है। वह हर व्यक्ति की पीड़ा को जानता है और सभी के मन की बातें समझता है।
चौपई १३
प्रजा धरत तब देह अपारा ॥
जब आकरख करत हो कबहूं ॥
तुम मै मिलत देह धर सभहूं ॥१३॥
हिंदी अर्थ
अर्थ: जब सृष्टिकर्ता प्रभु विस्तार करते हैं तो सभी सृष्टि उनमें से प्रकट होती है, और जब वे समेटते हैं तो सभी जीव पुनः परमात्मा में ही लीन हो जाते हैं।
चौपई १४
आप आपनी बूझ उचारै ॥
तुम सभ ही ते रहत निरालम ॥
जानत बेद भेद अर आलम ॥१४॥
हिंदी अर्थ
अर्थ: जितने भी प्राणी शरीर धारण करते हैं, वे अपनी-अपनी समझ के अनुसार प्रभु की महिमा का बखान करते हैं। लेकिन प्रभु सबसे निर्लेप और वेदों व ग्रंथों के भेदों से परे हैं।
चौपई १५
आदि अनील अनादि असंभ ॥
ताका मूढ़ उचारत भेदा ॥
जाको भेव न पावत बेदा ॥१५॥
हिंदी अर्थ
अर्थ: वह प्रभु निराकार, निर्विकार और अनादि हैं, जिसका भेद वेद भी नहीं जान सकते। केवल अज्ञानी ही उसे किसी सीमित रूप में बांधने का प्रयास करते हैं।
चौपई १६
महां मूढ़ कछु भेद न जानत ॥
महादेव कौ कहत सदा सिव ॥
निरंकार का चीनत नहि भिव ॥१६॥
हिंदी अर्थ
अर्थ: जो लोग परमात्मा को केवल पत्थर या किसी एक रूप तक सीमित समझते हैं, वे उसके सच्चे स्वरूप को नहीं जानते। जो लोग केवल किसी एक देवता को ही परम सत्य मानते हैं, वे निराकार परमात्मा के वास्तविक स्वरूप को पूरी तरह नहीं पहचानते।
चौपई १७
बरनत भिन्न भिन्न तुहि तेती ॥
तुमरा लखा न जाए पसारा ॥
किह बिध सजा प्रथम संसारा ॥१७॥
हिंदी अर्थ
अर्थ: हर मनुष्य अपनी-अपनी बुद्धि के अनुसार आपका वर्णन करता है, लेकिन कोई भी आपकी असीम सृष्टि और लीला के रहस्य को पूरी तरह नहीं जान सकता।
चौपई १८
रंक भयो राव कहीं भूपा ॥
अंडज जेरज सेतज कीनी ॥
उतभुज खान बहुर रच दीनी ॥१८॥
हिंदी अर्थ
अर्थ: आपका रूप एक है, लेकिन आप रंक, राजा और विभिन्न रूपों में दिखाई देते हैं। आप अंडज, जेरज, स्वेदज और उद्भिज चारों खानियों के जीवों को उत्पन्न करने वाले हैं।
चौपई १९
कहूं सिमट भयो संकर इकैठा ॥
सगरी सृष्ट दिखाए अचंभव ॥
आद जुगाद सरूप सुयंभव ॥१९॥
हिंदी अर्थ
अर्थ: कहीं आप राजा बनकर सिंहासन पर बैठते हैं, तो कहीं योगी बनकर एकांत में रमते हैं। आपकी यह अद्भुत सृष्टि और लीला देखकर मन विस्मित हो जाता है।
चौपई २०
सिख्य उबार असिख्य संघरो ॥
दुष्ट जिते उठवत उतपाता ॥
सकल मलेछ करो रण घाता ॥२०॥
हिंदी अर्थ
अर्थ: हे प्रभु, अब मेरी रक्षा करें। अपने सिखों और भक्तों की रक्षा करें तथा बुराई और अन्याय को दूर करें। जो दुष्ट लोग उत्पात और परेशानी फैलाते हैं, उनकी बुरी शक्ति को समाप्त करें।
चौपई २१
तिन के दुष्ट दुखित ह्वै मरे ॥
पुरख जवन पग परे तिहारे ॥
तिन के तुम संकट सभ टारे ॥२१॥
हिंदी अर्थ
अर्थ: जो लोग प्रभु की शरण में आते हैं, उनके दुख और कष्ट दूर होते हैं। जो सच्चे मन से प्रभु के चरणों में आते हैं, उनके सभी संकट दूर किए जाते हैं।
चौपई २२
ता के काल निकट नहि ऐहै ॥
रच्छा होय ताहि सभ काला ॥
दुष्ट अरिष्ट टरे तत्काला ॥२२॥
हिंदी अर्थ
अर्थ: जो व्यक्ति काल अर्थात परम शक्ति का एक बार भी सच्चे मन से ध्यान करता है, उसके पास भय और मृत्यु का डर नहीं आता। प्रभु उसकी हर समय रक्षा करते हैं और दुख तथा संकट दूर करते हैं।
चौपई २३
ताके ताप तनक महि हरिहो ॥
रिद्ध सिद्ध घर मों सभ होए ॥
दुष्ट छाह छ्वै सकै न कोए ॥२३॥
हिंदी अर्थ
अर्थ: जिस व्यक्ति पर प्रभु की कृपा दृष्टि पड़ती है, उसके दुख और कष्ट दूर हो जाते हैं। उसके जीवन में सुख और समृद्धि आती है तथा बुरी शक्तियां उसे नुकसान नहीं पहुंचा पातीं।
चौपई २४
काल फास ते ताहि उबारा ॥
जिन नर नाम तिहारो कहा ॥
दारिद दुष्ट दोख ते रहा ॥२४॥
हिंदी अर्थ
अर्थ: जो व्यक्ति एक बार भी सच्चे मन से प्रभु को याद करता है, वह मृत्यु के बंधन और भय से बचता है। जो व्यक्ति प्रभु का नाम लेता है, वह गरीबी, दुख और बुराइयों से बचने की शक्ति पाता है।
चौपई २५
आप हाथ दै लेहु उबारी ॥
सरब ठौर मो होहु सहाई ॥
दुष्ट दोख ते लेहु बचाई ॥२५॥
हिंदी अर्थ
अर्थ: हे प्रभु, मैं आपकी शरण में आया हूं। अपने हाथ से मेरी रक्षा करें। हर जगह मेरा साथ दें और मुझे दुष्टों, बुराइयों तथा कठिनाइयों से बचाएं।
चौपई २६
ग्रंथ करा पूरन सुभ राता ॥
किलविख सकल देह को हरता ॥
दुष्ट दोखीअन को छै करता ॥
हिंदी अर्थ
अर्थ: हे जगत की माता स्वरूप परम शक्ति, आपने हम पर कृपा की और इस ग्रंथ की रचना को पूरा करवाया। आपकी शक्ति सभी पापों और बुराइयों को दूर करने वाली है तथा दुष्ट और दोष करने वालों का नाश करती है।
चौपई २७
पूरन करा ग्रंथ तत्काला ॥
मन बाँछत् फल पावे सोई ॥
दूख न तिसै ब्यापत कोई ॥
हिंदी अर्थ
अर्थ: जब श्री असिधुज प्रभु दयालु हुए, तब यह ग्रंथ पूरा हुआ। जो व्यक्ति इसका पाठ करता है, वह अपनी मन की इच्छाओं के अनुसार फल पाता है और दुख उसे परेशान नहीं करते।
अड़िल्ल
सुनै मूढ़ चित्त लाए चतुरता आवई ॥
दूख दर्द भौ निकट ना तिन नर कै रहै ॥
हो जो याकि एक बार चौपई को कहै ॥
चौपई २९
अर्ध सहस फुन तीन कहिजै ॥
भाद्रव सुदी अष्टमी रविवारा ॥
तीर सतुद्रव ग्रंथ सुधारा ॥
हिंदी अर्थ
अर्थ: इन पंक्तियों में इस ग्रंथ की रचना पूरी होने के समय और स्थान का उल्लेख किया गया है। इसमें संवत, भाद्रपद महीने की शुक्ल पक्ष अष्टमी, रविवार और सतलुज नदी के किनारे ग्रंथ के पूरा होने का वर्णन है।
सवैया
राम रहीम पुरान कुरान अनेक कहैं मत एक न मान्यो ॥
सिमृत सास्त्र बेद सभे बहु भेद कहैं हम एक न जानयो ॥
श्री असिपान कृपा तुमरी कर, मैं न कहयो सभ तोहे बखानयो ॥
हिंदी अर्थ
अर्थ: हे प्रभु, जब से मैंने आपके चरणों की शरण ली है, तब से मैंने किसी अन्य को अपने सामने नहीं माना। राम, रहीम, पुराण, कुरान और अन्य मतों में अलग-अलग बातें कही गई हैं, लेकिन मैं केवल आपकी शरण और कृपा को मानता हूं। स्मृतियों, शास्त्रों और वेदों में अनेक भेद बताए गए हैं, पर मैं किसी दूसरे मार्ग को नहीं जानता। हे प्रभु, आपकी कृपा से ही मैंने आपका वर्णन किया है।
दोहरा
बाँहे गहे की लाज अस, गोबिन्द दास तुहार ॥
हिंदी अर्थ
अर्थ: मैंने सभी दूसरे सहारों और द्वारों को छोड़कर केवल आपकी शरण ली है। हे प्रभु, आपने मेरा हाथ पकड़ा है, इसलिए अपने सेवक की लाज और सम्मान बनाए रखें।
वाहेगुरु जी की फ़तह ॥
Conclusion
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